नमस्कार, झारखण्ड राज्य के बोकारो जिले में स्थित एक पावन धरती , एक ऐसी पावन धरती जो खुद में आश्चर्य से भरी हुई है, ये धार्मिक स्थल जो बाबा भैरव धाम के नाम से जानी जाती है जो बोकारो मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर झारखण्ड तथा बंगाल की सीमा पर स्थित है, बाबा भैरव धाम मंदिर इतना प्राचीन रहस्यमई तथा विशेष होने के बाद भी आज भी बहुत से लोग इसकी रहस्यमई इतिहास से वंचित है आख़िर ऐसा क्यों, आइए आज हम हमारे इस यूट्यूब चैनल के माध्यम से हमारे संस्कृति और हमारे धर्म से जुड़ते हैं और इस पावन धाम के बारे में कुछ अकल्पनिक बातें जानते हैं, खबर है पुराणों में लिखी सच्चाई की, खबर हमारे धार्मिक तथा सांस्कृतिक कथाओं की, खबर है हमारे इतिहास में घटित सच्ची घटनाओं की। कहां जाता है कि जब पांडवों को शतरंज से हार के रूप में वनवास तथा अज्ञात दिया गया था तब वह यहां कुछ समय के लिए विश्राम करने रुके थे हमारे प्राचीन काल में यही स्थान मानभूम क्षेत्र में आता था उसी दौरान माता कुंती की प्यास बुझाने के लिए अर्जुन ने अपने गाण्डीव से वान चलाकर यहां पे बहते पवित्र कुंड की उत्पत्ति की । उस समय यहां चारों ओर जंगल हुआ करता था, कहा जाता है कि यह बहता कुंड भीषण गर्मी में भी सुखा नहीं पड़ता है तथा, इस कुंड के पानी को आसपास के लोग द्वारा अमृत का दरजा दिया गया है ऐसा अमृत जो अनेको बिमारियों से लड़ने की ताकत देता है तथा इसके स्पर्श से हमारी आत्मा की शुद्धि होती है, इस कुंड का पानी 12 माह बहते रहता है , तथा इस कुंड के पानी का स्तर अनेक कालो से एक समान है, यहां रहने वाले लोगों का मानना है कि यहां बसे बाबा भैरव जी की मूर्ति की स्थापना नहीं की गई है, यह मूर्ति खुद उत्पन्न हुई है माना जाता है कि यहां आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती है। आइए इस पावन भूमि को वर्षों से पूजने वाले पुजारी जी से इसके बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करते हैं। तो जैसा कि हमने जाना यह प्राचीन बाबा भैरव धाम मंदिर तथा इसके पावन इतिहास के बारे में जो आज भी हमारे धर्म हमारे संस्कृति की नींव को ले खड़ा है । अगर आपको हमारी यह वीडियो पसंद आयी तो हमारे यूट्यूब चैनल को जरूर सब्सक्राइब करे, तब तक के लिए राधे,राधे ।